समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई कड़े कानून और कल्याणकारी योजनाएं बनाई हैं। इन्हीं में से एक है SC/ST (Prevention of Atrocities) Act 1989 जिसके तहत Atrocity Prevention Scheme (अत्याचार निवारण योजना) चलाई जाती है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उन लोगों को न्याय और आर्थिक राहत (Monetary Relief) प्रदान करना है, जिन्हें जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के अत्याचार का सामना करना पड़ा हो।
वर्ष 2026 के नवीनतम अपडेट्स के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को अपराध की गंभीरता के आधार पर ₹85,000 से लेकर ₹8,25,000 तक की मुआवजा राशि (Compensation Amount) प्रदान की जाती है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको इस योजना के नियम, पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी देंगे।
Important Highlights: Atrocity Prevention Scheme 2026
नीचे दी गई टेबल में इस SC ST Act Compensation Scheme के मुख्य बिंदुओं को (Table format) में समझाया गया है:
| विवरण (Description) | जानकारी (Information) |
|---|
| योजना का नाम | अत्याचार निवारण योजना (Atrocity Prevention Scheme) |
| संबंधित अधिनियम | SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 |
| लाभार्थी (Beneficiaries) | अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के पीड़ित |
| मुआवजा राशि (Relief Amount) | ₹85,000 से ₹8,25,000 तक (अपराध के अनुसार) |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन (पुलिस/समाज कल्याण विभाग) व ऑनलाइन |
| पैसा कैसे मिलता है? | सीधे बैंक खाते में (DBT) |
| Join Telegram For Latest Update | Join Telegram |
| Free Test & Notes | Download Now |
मुवाअजा राशि का विवरण (Financial Assistance Details)
इस योजना के तहत दी जाने वाली राहत राशि एकमुश्त (Single Installment) नहीं दी जाती, बल्कि इसे केस की प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग चरणों (Stages) में दिया जाता है। अपराध की प्रकृति के अनुसार राशि इस प्रकार है:
- सामान्य उत्पीड़न, गाली-गलौज या संपत्ति का नुकसान: इस स्थिति में कम से कम ₹85,000 की सहायता दी जाती है।
- गंभीर चोट या महिला संबंधी अपराध (छेड़छाड़/दुष्कर्म): ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति के अनुसार ₹2,00,000 से ₹4,00,000 तक का मुआवजा दिया जाता है।
- हत्या या पूर्ण विकलांगता (Murder or Permanent Disability): अगर किसी कमाऊ सदस्य (Earning Member) की हत्या हो जाती है, तो परिवार को ₹8,25,000 तक की सहायता राशि दी जाती है।
भुगतान के चरण (Stages of Payment):
- 25% से 50% राशि: FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज होने और मेडिकल रिपोर्ट आने पर।
- 50% राशि: पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट (Charge Sheet) पेश करने पर।
- शेष 25% राशि: कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषी (Convicted) करार दिए जाने पर।
Eligibility Criteria (योजना के लिए पात्रता)
Atrocity Prevention Scheme का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- जाति (Category): पीड़ित व्यक्ति अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का होना चाहिए।
- आरोपी की जाति: अपराध करने वाला व्यक्ति (आरोपी) SC/ST वर्ग का नहीं होना चाहिए (Non-SC/ST)।
- FIR दर्ज होना: संबंधित थाने में SC/ST (PoA) Act 1989 की धाराओं के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए।
- जाति प्रमाण पत्र: पीड़ित के पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया वैध जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) होना अनिवार्य है।
Required Documents (आवश्यक दस्तावेज)
मुआवजा राशि प्राप्त करने की फाइल तैयार करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों (Documents) की आवश्यकता होती है:
- पीड़ित का आधार कार्ड और जन-आधार कार्ड
- जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
- मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)
- थाने में दर्ज की गई FIR की प्रमाणित कॉपी
- पुलिस की चार्जशीट (Charge Sheet) की कॉपी
- मेडिकल रिपोर्ट (चोट या अन्य शारीरिक नुकसान के मामले में)
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र (हत्या के मामले में)
- पीड़ित या आश्रित का बैंक पासबुक (Bank Account Details)
Application Process: मुआवजा राशि के लिए आवेदन कैसे करें?
अत्याचार निवारण योजना के तहत सहायता राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
- FIR दर्ज करवाएं: घटना होने पर सबसे पहले अपने नजदीकी पुलिस थाने या SC/ST सेल में जाकर PoA Act के तहत FIR दर्ज करवाएं।
- मेडिकल जांच: यदि कोई शारीरिक चोट है, तो सरकारी अस्पताल से मेडिकल (MLC) जरूर करवाएं।
- फाइल तैयार करना: पुलिस जांच अधिकारी (Investigating Officer – DSP रैंक) घटना की रिपोर्ट और FIR की कॉपी समाज कल्याण विभाग (Social Justice and Empowerment Department) को भेजते हैं।
- विभाग में आवेदन: पीड़ित व्यक्ति या उसके परिजन अपने सभी दस्तावेजों के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer) के कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं। राजस्थान जैसे राज्यों में इसे SSO Portal / SJMS के माध्यम से ऑनलाइन भी ट्रैक किया जा सकता है।
- राशि का हस्तांतरण: जिलाधिकारी (District Magistrate) की मंजूरी के बाद पहली किश्त सीधे पीड़ित के बैंक खाते में DBT के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. क्या Atrocity Act के तहत झूठी FIR दर्ज कराने पर भी मुआवजा मिलता है? Ans. नहीं, यदि जांच में या कोर्ट में FIR झूठी (False) पाई जाती है, तो मुआवजा रोक दिया जाता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी की जा सकती है, साथ ही कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
Q2. FIR दर्ज होने के कितने दिन बाद पहली किश्त मिलती है? Ans. नए नियमों के अनुसार, FIR दर्ज होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के लगभग 7 दिनों के भीतर राहत राशि की पहली किश्त (25% या 50%) जारी करने का प्रावधान है।
Q3. अगर पीड़ित की मृत्यु हो जाए तो पैसा किसे मिलता है? Ans. हत्या या मृत्यु के मामले में, पूरी मुआवजा राशि पीड़ित के कानूनी आश्रितों (पत्नी, बच्चों या माता-पिता) को दी जाती है। साथ ही आश्रित को सरकारी नौकरी या पेंशन का भी प्रावधान है।
Q4. क्या इस योजना का लाभ सभी जातियों के लोगों को मिलता है? Ans. नहीं, यह योजना विशेष रूप से केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों के संरक्षण के लिए है।
Q5. कोर्ट में केस हार जाने पर क्या मुआवजा वापस करना पड़ता है? Ans. अगर केस में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हो जाता है, तो अमूमन पीड़ित से राशि वापस नहीं ली जाती है, बशर्ते यह साबित न हो जाए कि केस दुर्भावनापूर्ण या पूरी तरह से मनगढ़ंत (Malicious) था।
Conclusion (निष्कर्ष)
SC ST Atrocity Prevention Scheme 2026 एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जो उत्पीड़ित वर्गों को न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए आर्थिक मजबूती और सुरक्षा प्रदान करती है। अगर आपके संज्ञान में ऐसा कोई मामला आता है, तो पीड़ित परिवार को इस योजना और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक जरूर करें ताकि उन्हें समय पर सरकारी सहायता मिल सके।